अबूझमाड़िया जनजाति: इतिहास, संस्कृति और रहन-सहन | Abujhmadiya Tribe in Hindi
इस पोस्ट में अबूझमाड़िया जनजाति (Abujhmadiya Tribe in Hindi) के बारे में, उनके इतिहास, रहन-सहन, संस्कृति, भाषा एवं बोली, विवाह प्रथा, कृषि एवं खान-पान, रीति-रिवाज, त्योहार एवं देवी-देवताओं के बारे में प्रामाणिक जानकारी दी गई है।
| Abujhmadiya Janjati Overview (अबूझमाड़िया जनजाति एक नजर में) | |
|---|---|
| जनजाति का नाम | अबूझमाड़िया जनजाति (विशेष पिछड़ी जनजाति - PVTG) |
| मूल जनजाति | यह गोंड जनजाति की एक प्रमुख उपशाखा 'माड़िया' का हिस्सा है। (हिल माड़िया) |
| प्रमुख गोत्र (गोती) | अक्का, मंडावी, धुर्वा, उसेंडी, मरका, गुंठा, अटमी, लखमी, बडडे, थोंड़ा |
| निवास स्थान | मुख्य रूप से नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र, बीजापुर, और दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) |
| भाषा एवं बोली | माड़ी (मड़िया) बोली (द्रविड़ भाषा परिवार) |
| पारंपरिक कृषि | पेंदा (स्थानांतरित कृषि) |
अबूझमाड़िया जनजाति (Abujhmadiya Janjati) - अबूझमाड़िया भारत सरकार द्वारा घोषित एक विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) है। 'अबूझमाड़' का शाब्दिक अर्थ है 'अज्ञात या जिसे बूझा न जा सके'। यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले माड़िया गोंडों को ही 'अबूझमाड़िया' कहा जाता है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बसे होने के कारण इन्हें 'हिल माड़िया' (Hill Mariya) भी कहा जाता है।
अबूझमाड़िया जनजाति को 'मेटाभूम' (पहाड़ी भूमि के लोग) कहा जाता है। वर्तमान में इनकी जनसंख्या लगभग 22,000 से 25,000 के बीच है। बाहरी दुनिया से कम संपर्क होने के कारण इस जनजाति की साक्षरता दर बहुत कम है, लेकिन इन्होने अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को सबसे शुद्ध रूप में सहेज कर रखा है।
अबूझमाड़िया जनजाति का इतिहास (History of Abujhmadiya Janjati)
अबूझमाड़िया जनजाति गोंडों की ही एक आदिम शाखा है। किंवदंतियों के अनुसार, प्राचीन काल में गोंड समुदाय के कुछ लोग बाहरी आक्रमणों या सामाजिक दबाव से बचकर अबूझमाड़ के इन दुर्गम और बीहड़ वनों में आ गए और यहीं बस गए। बाहरी दुनिया से कटे होने के कारण वे अबूझमाड़िया कहलाए। ये प्रकृति के अत्यधिक करीब होते हैं और अपनी भूमि व जंगलों की रक्षा के लिए जाने जाते हैं।
संस्कृति एवं रहन-सहन (Culture and Heritage)
अबूझमाड़िया जनजाति की संस्कृति पूर्णतः प्रकृति पर आधारित है। इनके वस्त्र अत्यंत सादे और कम होते हैं; पुरुष अक्सर केवल लंगोटी (कौपीन) पहनते हैं और महिलाएं कमर के नीचे वस्त्र धारण करती हैं। हालांकि समय के साथ इसमें बदलाव आ रहा है। इनका खान-पान जंगलों पर निर्भर है। ये कंद-मूल, शिकार और अपने द्वारा उगाए गए मोटे अनाज खाते हैं। सल्फी, ताड़ी और महुआ इनका प्रिय पेय पदार्थ है।
अबूझमाड़िया जनजाति की कृषि (Agriculture - Penda)
अबूझमाड़िया जनजाति मुख्य रूप से स्थानांतरित कृषि (Shifting Cultivation) करती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'पेंदा' (Penda) कहा जाता है। इसमें पहाड़ी ढलानों पर जंगलों और झाड़ियों को काटकर सुखाया जाता है, फिर आग लगा दी जाती है। उसी राख पर बारिश होने के बाद बीजों का छिड़काव किया जाता है। ये लोग मुख्यतः कोदो, कुटकी, मड़िया, मक्का और ज्वार जैसे मोटे अनाज उगाते हैं।
लोकगीत एवं लोकनृत्य (Folk Song and Dance)
लोकनृत्य: अबूझमाड़िया जनजाति का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध लोकनृत्य 'ककसार' (Kakasar) है। यह नृत्य इनके इष्टदेव 'ककसार' की पूजा के समय फसल की अच्छी पैदावार की खुशी में किया जाता है। इसके अलावा गेंड़ी नृत्य भी इनके बीच प्रचलित है。
लोकगीत: इनके प्रमुख लोकगीतों में रिलो गीत, ककसार पाटा, और लिंगोपेन की स्तुति के गीत शामिल हैं। ये गीत मुख्य रूप से प्रकृति, देवी-देवताओं और प्रेम पर आधारित होते हैं।
देवी-देवता और धार्मिक आस्था (Deities of Abujhmariya Janjati)
अबूझमाड़िया जनजाति प्रकृति पूजक है और इनके देवी-देवता जंगलों, पहाड़ियों और धरती से जुड़े हैं। जादू-टोने और तंत्र-मंत्र में इनकी गहरी आस्था होती है, जिसे करने वाले को 'गायता' या 'सिरहा' कहा जाता है। इनके प्रमुख देवी-देवता निम्नलिखित हैं:
- तालुर मुत्ते (धरती माता): यह इनकी सर्वप्रमुख देवी हैं। अबूझमाड़िया मानते हैं कि धरती ही उनका पालन-पोषण करती है, इसलिए कोई भी नया कार्य या कृषि शुरू करने से पहले धरती माता की पूजा की जाती है।
- ठाकुर देव: ये गांव के रक्षक देवता माने जाते हैं, जो गांव को बीमारियों और जंगली जानवरों से बचाते हैं।
- लिंगोपेन: बस्तर की जनजातियों के प्रमुख देवता, जिन्हें संगीत, कला और घोटुल का संस्थापक माना जाता है।
- ककसार देव: अच्छी फसल और वर्षा के देवता।
- पेन (कुल देवता): प्रत्येक गोत्र (गोती) का अपना एक 'पेन' (देवता) होता है, जिसे देवगुड़ी में स्थापित किया जाता है।
अबूझमाड़िया जनजाति मे विवाह प्रथा (Wedding Ceremony)
इस जनजाति में समगोत्रीय विवाह वर्जित है। इनमें मुख्यतः निम्न प्रकार की विवाह प्रथाएं प्रचलित हैं:
- कांडाबरा (कौमार्य संस्कार): लड़कियों में रजस्वला होने से पूर्व यह एक विशेष संस्कार किया जाता है।
- ओड़ियत्ता (हठ/घुसपैठ विवाह): जब लड़की अपनी मर्जी से लड़के के घर जाकर रहने लगती है।
- गुरावट (विनिमय विवाह): दो परिवारों के बीच लड़के-लड़कियों का आदान-प्रदान।
- विधवा पुनर्विवाह: जिसे 'चूड़ी पहनाना' भी कहा जाता है।
भाषा एवं बोली (Language)
अबूझमाड़िया जनजाति के लोग 'माड़ी' (मड़िया) बोली बोलते हैं। यह बोली द्रविड़ भाषा परिवार की एक महत्वपूर्ण सदस्य है और इसका व्याकरण व शब्दावली तमिल, तेलुगु और गोंडी भाषा से काफी मिलती-जुलती है।
युवागृह - घोटुल (Youth Dormitory - Ghotul)
हालांकि घोटुल प्रथा मुख्य रूप से मुरिया जनजाति की पहचान है, लेकिन अबूझमाड़िया समाज में भी युवाओं के समाजीकरण के लिए युवागृह (घोटुल / कोसी घोटुल) की परंपरा पाई जाती है। यह गांव के किनारे बनी एक झोपड़ी होती है, जहाँ गांव के अविवाहित युवक-युवतियां शाम को एकत्र होते हैं। यहाँ वे अपने पारंपरिक नृत्य (ककसार), गीत, लोककथाएं और सामाजिक रीति-रिवाज सीखते हैं। जीवनसाथी चुनने में भी घोटुल की अहम भूमिका होती है।
अबूझमाड़िया जनजाति के महत्वपूर्ण बिन्दु (Important Facts)
- कृषि का नाम: अबूझमाड़िया जनजाति द्वारा की जाने वाली स्थानांतरित कृषि को 'पेंदा' कहा जाता है।
- कुरमा (Kurma): इनके समाज में गर्भवती महिलाओं के प्रसव (Delivery) के लिए मुख्य घर से अलग एक विशेष झोपड़ी बनाई जाती है, जिसे 'कुरमा' कहते हैं।
- पेय पदार्थ: सल्फी (बस्तर का बीयर), छिंद रस और महुआ इनका प्रमुख पेय पदार्थ है।
- प्रमुख व्यक्ति: इनके परगना (कई गांवों का समूह) के मुखिया को 'मांझी' और धार्मिक कार्यों को संपन्न कराने वाले को 'गायता' कहा जाता है।
- गोत्र प्रणाली: इनके समाज में वंश को कई गोत्रों में बांटा गया है, जिसे ये लोग 'गोती' कहते हैं।
अबूझमाड़िया जनजाति से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य (FAQ)
- प्रश्न: अबूझमाड़िया जनजाति का निवास स्थान मुख्य रूप से कहाँ है?
- उत्तर: यह जनजाति मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करती है, इसके अतिरिक्त यह बीजापुर और दंतेवाड़ा में भी पाई जाती है।
- प्रश्न: अबूझमाड़िया जनजाति की पारंपरिक कृषि को क्या कहा जाता है?
- उत्तर: इनकी स्थानांतरित कृषि को 'पेंदा' (Penda) कहा जाता है, जिसमें पहाड़ी ढलानों पर जंगलों को जलाकर खेती की जाती है।
- प्रश्न: अबूझमाड़िया का सबसे प्रमुख लोकनृत्य कौन सा है?
- उत्तर: 'ककसार' (Kakasar) इनका सबसे प्रमुख लोकनृत्य है, जो फसल की अच्छी पैदावार की खुशी में अपने इष्टदेव की पूजा के समय किया जाता है।
- प्रश्न: 'मेटाभूम' किसे कहा जाता है?
- उत्तर: दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करने के कारण अबूझमाड़िया जनजाति को 'मेटाभूम' (पहाड़ी भूमि के लोग) या 'हिल माड़िया' कहा जाता है।
- प्रश्न: अबूझमाड़िया समाज में 'कुरमा' क्या है?
- उत्तर: गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए मुख्य घर से कुछ दूरी पर बनाई गई एक विशेष झोपड़ी को इनके समाज में 'कुरमा' कहा जाता है।