अगरिया जनजाति: इतिहास, संस्कृति और रहन-सहन | Agariya Tribe in Hindi
इस पोस्ट में अगरिया जनजाति (Agariya Tribe in Hindi) के बारे में, उनके इतिहास, रहन-सहन, संस्कृति, भाषा एवं बोली, विवाह प्रथा, कृषि एवं खान-पान, रीति-रिवाज, त्योहार एवं देवी-देवताओं के बारे में प्रामाणिक जानकारी दी गई है।
| Agariya Tribe Overview (अगरिया जनजाति एक नजर में) | |
|---|---|
| जनजाति का नाम | अगरिया जनजाति |
| मूल जनजाति | यह गोंड जनजाति की ही एक प्रमुख उपशाखा है। |
| प्रमुख उपजातियां | पथरिया, खूंटिया और असुर अगरिया |
| निवास स्थान | छत्तीसगढ़ (कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, कोरबा, कोरिया, बलरामपुर, सरगुजा), मध्य प्रदेश (मंडला, डिंडोरी), उत्तर प्रदेश और झारखंड। |
| भाषा एवं बोली | अगरिया बोली, गोंडी, हिंदी और छत्तीसगढ़ी |
| पारंपरिक व्यवसाय | लौह अयस्क (Iron Ore) को पिघलाकर लोहे के उपकरण बनाना। |
अगरिया जनजाति (Agariya Janjati) - अगरिया जनजाति मुख्य रूप से भारत के मध्य भाग (विशेषकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश) में पाई जाने वाली एक अत्यंत परिश्रमी जनजाति है। यह गोंड जनजाति की ही एक उपशाखा है, जो पारंपरिक रूप से लोहे का काम करती है। 'अगरिया' शब्द की उत्पत्ति 'आग' (Fire) से मानी जाती है, क्योंकि इनका पूरा जीवन और व्यवसाय आग की भट्टी के इर्द-गिर्द घूमता है। लौह शिल्प कला में इन्हें महारत हासिल है।
अगरिया जनजाति का इतिहास एवं उपजातियां (History & Sub-tribes)
जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में गोंड समाज के दो भाई थे। जब एक भाई को जंगल में कंद-मूल नहीं मिला, तो उसने गुस्से में एक लाल पत्थर को आग में डाल दिया। सुबह उसने देखा कि वह पत्थर पिघलकर मजबूत लोहा बन गया है। उसी दिन से उसे लोहा बनाने का ज्ञान प्राप्त हुआ और उसके वंशज 'अगरिया' कहलाए।
उपकरण बनाने की विधि के आधार पर इनकी दो प्रमुख उपजातियां हैं:
- पथरिया अगरिया: जो लोग आग से निकाले गए गर्म लोहे को 'पत्थर' (Stone) पर रखकर हथौड़े से पीटते हैं।
- खूंटिया अगरिया: जो लोग गर्म लोहे को लोहे की 'खूंटी' (Peg/Anvil) पर रखकर पीटते हैं। सरगुजा क्षेत्र में इन्हें असुर अगरिया भी कहा जाता है।
पारंपरिक व्यवसाय: लौह शिल्प (Traditional Iron Smelting)
अगरिया जनजाति का सबसे प्रमुख व्यवसाय मिट्टी और पत्थरों (लौह अयस्क) से लोहा निकालना और उसके उपकरण (जैसे- कुल्हाड़ी, फावड़ा, हंसिया, तीर की नोक) बनाना है।
इनकी लोहे की भट्टी मिट्टी की बनी होती है। भट्टी में आग को धधकाने के लिए 'धौंकनी' (Bellows) का प्रयोग किया जाता है, जो चमड़े से बनी होती है। घर की महिलाएं आमतौर पर इस धौंकनी पर खड़ी होकर अपने पैरों से उसे दबाती हैं, जिससे भट्टी में हवा जाती है और आग तेज होती है। इस पारंपरिक तकनीक से निकले लोहे की गुणवत्ता अत्यंत उच्च होती है।
खान-पान और 'उड़द दाल' का महत्व (Food & Importance of Urad Dal)
इनका सामान्य भोजन कोदो-कुटकी, मक्का, चावल और मौसमी भाजियां हैं। ये लोग मांसाहारी भी होते हैं और महुआ की शराब का सेवन करते हैं।
उड़द दाल का विशेष महत्व: अगरिया जनजाति में 'उड़द दाल' (Urad Dal) को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इनके किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या विवाह का अनुष्ठान उड़द दाल के बिना संपन्न नहीं हो सकता। विवाह के समय वधूमूल्य के रूप में भी उड़द दाल भेंट की जाती है।
अगरिया जनजाति के देवी-देवता (Deities of Agariya Tribe)
अगरिया जनजाति के सर्वोच्च और प्रमुख देवता 'लोहासुर' (Lohasur) हैं।
- लोहासुर देवता का निवास: इनकी मान्यता है कि लोहासुर देवता इनकी आग धधकाने वाली भट्टी (धौंकनी) में निवास करते हैं।
- काले मुर्गे की बलि: लोहासुर देवता को प्रसन्न करने और अपने व्यवसाय में बरकत के लिए ये मुख्य रूप से दशहरे के दिन (या फाल्गुन माह में) लोहासुर को 'काले मुर्गे' की बलि चढ़ाते हैं।
इसके अलावा ये बूढ़ादेव, ठाकुरदेव, दूल्हा देव, और शीतला माता की भी पूजा करते हैं।
विवाह संस्कार (Wedding Ceremony)
अगरिया समाज पितृसत्तात्मक होता है और इनमें समगोत्रीय विवाह वर्जित है। समाज में क्रय विवाह सबसे अधिक प्रचलित है, जिसमें उड़द दाल का शगुन दिया जाता है। इसके अलावा समाज में ढुकू (घुसपैठ विवाह), उढ़रिया (सहपलायन), और गुरावट (विनिमय विवाह) को भी मान्यता प्राप्त है। विधवा पुनर्विवाह को 'चूड़ी पहनाना' कहा जाता है।
अगरिया जनजाति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (FAQs)
- प्रश्न: अगरिया जनजाति के प्रमुख देवता कौन हैं और उनका निवास कहाँ माना जाता है?
- उत्तर: अगरिया जनजाति के प्रमुख देवता 'लोहासुर' हैं। उनका निवास लोहे की भट्टी (धौंकनी) में माना जाता है।
- प्रश्न: लोहासुर देवता को किस पशु/पक्षी की बलि दी जाती है?
- उत्तर: लोहासुर देवता को मुख्य रूप से 'काले मुर्गे' की बलि दी जाती है।
- प्रश्न: अगरिया जनजाति में किस अनाज/दाल का सबसे अधिक पवित्र महत्व है?
- उत्तर: 'उड़द दाल' का। इनके सभी शुभ कार्य और विवाह उड़द दाल के बिना अधूरे माने जाते हैं।
- प्रश्न: "द अगरिया" (The Agaria) नामक प्रसिद्ध पुस्तक किसने लिखी है?
- उत्तर: यह पुस्तक प्रसिद्ध मानवशास्त्री वेरियर एल्विन (Verrier Elwin) ने लिखी है, जिसमें उन्होंने अगरिया जनजाति के लौह शिल्प और संस्कृति का विस्तार से वर्णन किया है। (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है)।
- प्रश्न: अगरिया जनजाति का मुख्य पारंपरिक व्यवसाय क्या है?
- उत्तर: लौह अयस्क को पिघलाकर लोहे के कृषि उपकरण और हथियार बनाना।