मुण्डा जनजाति: इतिहास, संस्कृति और रहन-सहन | Munda Tribe in Hindi
इस पोस्ट मे मुण्डा जनजाति (Munda Tribe in Hindi) के बारे मे, उनके इतिहास, रहन-सहन, संस्कृति, भाषा एवं बोली, विवाह प्रथा, कृषि एवं खान-पान, रीति-रिवाज, त्योहार एवं देवी-देवताओ के बारे मे प्रामाणिक जानकारी दी गयी है।
| Munda Tribe Overview (मुण्डा जनजाति एक नजर में) | |
|---|---|
| जनजाति का नाम | मुण्डा जनजाति (Munda Tribe) |
| प्रजातीय समूह | प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड (कोलारियन समूह) |
| प्रमुख गोत्र (किली) | मुण्डा समाज में गोत्र को 'किली' कहा जाता है। प्रमुख गोत्र: भेंगरा, बोदरा, होरो (कछुआ), नाग, पूर्ति, तोपनो, केरकेट्टा, लुगुन आदि। |
| निवास स्थान | मूल रूप से झारखंड (छोटा नागपुर)। छत्तीसगढ़ में: जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर, रायगढ़, और बस्तर संभाग। इसके अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार। |
| भाषा एवं बोली | मुण्डारी (ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार), सादरी और हिंदी |
| सबसे बड़ी ऐतिहासिक पहचान | भगवान बिरसा मुण्डा और 'उलगुलान' (मुण्डा विद्रोह) |
मुण्डा जनजाति (Munda Janjati) और उनका इतिहास
मुण्डा जनजाति भारत की सबसे प्राचीन और प्रमुख जनजातियों में से एक है। मुण्डा शब्द का सामान्य अर्थ 'विशिष्ट व्यक्ति' या 'गांव का मुखिया' होता है। मानवशास्त्रियों के अनुसार, ये कोलारियन (Austroasiatic) समूह के मूल निवासी हैं। प्राचीन काल में ये उत्तर-पश्चिम भारत से होते हुए आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) और फिर मध्य भारत के 'छोटा नागपुर के पठार' (वर्तमान झारखंड) में आकर बस गए। यहीं से इनकी कुछ शाखाएं छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों (सरगुजा, जशपुर) और दक्षिणी जिलों में फैलीं।
भगवान बिरसा मुण्डा और उलगुलान: मुण्डा जनजाति का इतिहास संघर्ष और स्वाभिमान का रहा है। 19वीं शताब्दी के अंत (1899-1900) में भगवान बिरसा मुण्डा ने अंग्रेजों के शोषण, जमींदारों के अत्याचार और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ एक ऐतिहासिक विद्रोह किया था, जिसे 'उलगुलान' (महान हलचल) कहा जाता है। आज पूरे भारत के आदिवासी बिरसा मुण्डा को 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) और भगवान के रूप में पूजते हैं।
भाषा एवं बोली (Language of Munda Tribe)
मुण्डा जनजाति की मातृभाषा 'मुण्डारी' (Mundari) है, जो ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा) भाषा परिवार का एक प्रमुख हिस्सा है। मुण्डारी भाषा साहित्य और लोककथाओं में अत्यंत समृद्ध है। अन्य जनजातियों और स्थानीय लोगों से संपर्क करने के लिए ये सादरी (Sadri), हिंदी और छत्तीसगढ़ी का भी बहुतायत में प्रयोग करते हैं।
युवागृह - गीतिओड़ा (Youth Dormitory - Gitiora)
मुण्डा जनजाति में भी युवाओं को सामाजिक और सांस्कृतिक शिक्षा देने के लिए युवागृह की परंपरा पाई जाती है, जिसे इनकी भाषा में 'गीतिओड़ा' (Gitiora) कहा जाता है। यह गांव के अविवाहित युवक-युवतियों का प्रशिक्षण केंद्र होता है, जहां वे अपने रीति-रिवाज, गीत और नृत्य सीखते हैं।
रहन-सहन और खान-पान (Lifestyle & Food)
मुण्डा लोग बहुत परिश्रमी होते हैं। इनके घर आमतौर पर मिट्टी के बने होते हैं, जिनकी छतों पर खपरैल या घास-फूस होती है। घरों की दीवारों को प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है।
पहनावा: पारंपरिक रूप से मुण्डा पुरुष जो वस्त्र पहनते हैं उसे 'बटोई' (Botoy) और महिलाओं के वस्त्र को 'परिया' (Paria) कहा जाता है। महिलाएं गोदना (Tattoo) गुदवाने की शौकीन होती हैं और कांसे, पीतल व चांदी के आभूषण पहनती हैं।
खान-पान: इनका मुख्य भोजन चावल, मक्का, कोदो-कुटकी और जंगल से प्राप्त कंद-मूल है। ये लोग मांसाहारी भी होते हैं। विशेष अवसरों और धार्मिक कार्यों पर चावल से बनी शराब, जिसे 'हड़िया' (Handia) या रानू कहते हैं, का सेवन अनिवार्य माना जाता है और इसे देवताओं को भी चढ़ाया जाता है।
कृषि और अर्थव्यवस्था (Agriculture of Munda Tribe)
मुण्डा जनजाति मुख्य रूप से स्थायी कृषक (Settled Cultivators) है। इन्होंने ही सबसे पहले जंगलों को साफ करके खेत बनाने की परंपरा शुरू की थी, जिसे 'खूंटकट्टी' (Khuntkatti) भूमि कहा जाता है। ये धान, मक्का, दलहन और तिलहन की खेती करते हैं। कृषि के साथ-साथ पशुपालन (गाय, बैल, सूअर, मुर्गी) और वनोपज संग्रहण इनके जीवन का मुख्य आधार है।
प्रमुख त्योहार (Major Festivals)
मुण्डा जनजाति के त्योहार प्रकृति और कृषि चक्र पर आधारित होते हैं। इनके प्रमुख त्योहार निम्नलिखित हैं:
- बा परब (सरहुल): यह वसंत ऋतु (चैत्र मास) में मनाया जाने वाला मुण्डाओं का सबसे बड़ा त्योहार है। इसमें सखुआ (साल) के फूलों की पूजा की जाती है।
- करम (Karam): भादो मास में करम वृक्ष की डाल की पूजा होती है। यह भाई-बहन के प्रेम और अच्छी फसल का त्योहार है।
- मागे परब (Mage Parab): यह माघ महीने में मनाया जाता है, जिसमें कृषि कार्य पूरा होने का जश्न मनाते हैं।
- फागु (Phagu): यह होली के समान फाल्गुन महीने में मनाया जाने वाला वसंत और शिकार का उत्सव है।
- सोहराई: दीपावली के समय पशुओं की पूजा का त्योहार।
लोकगीत एवं लोकनृत्य (Folk Songs & Dances)
मुण्डा समाज नृत्य और संगीत का बहुत शौकीन है। इनके लोकगीत और नृत्य ऋतुओं के अनुसार बदलते हैं:
- जदुर नृत्य (Jadur): सरहुल पर्व के अवसर पर किया जाने वाला समूह नृत्य।
- पाइका नृत्य (Paika): यह एक मार्शल (युद्ध) नृत्य है, जिसे केवल पुरुषों द्वारा हथियार (ढाल और तलवार) लेकर वीरता का प्रदर्शन करते हुए किया जाता है।
- करम नृत्य: करम पूजा के समय रात भर किया जाने वाला नृत्य।
- जापी (Japi): शिकार से लौटते समय किया जाने वाला विजय नृत्य।
देवी-देवता एवं धार्मिक जीवन (Deities of Munda Tribe)
मुण्डा जनजाति के लोग 'जीववाद' (Animism) और प्रकृति पूजा में विश्वास रखते हैं। इनके प्रमुख देवी-देवता हैं:
- सिंगबोंगा (Singbonga): यह मुण्डाओं के सर्वोच्च देवता हैं, जिन्हें सूर्य (Sun) का प्रतीक माना जाता है।
- मारंग बुरु (Marang Buru): पहाड़ या सर्वोच्च देवता, जो संकटों से बचाते हैं।
- हातु बोंगा (Hatu Bonga): गांव के रक्षक देवता।
- देसाउली (Desauli): गांव की प्रमुख देवी।
मुण्डाओं के पूजा स्थल को 'सरना' (Sarna) कहा जाता है और पूजा संपन्न कराने वाले धार्मिक प्रधान (पुजारी) को 'पाहन' (Pahan) कहा जाता है।
मुण्डा जनजाति में विवाह (Marriage in Munda Tribe)
मुण्डा जनजाति में समगोत्रीय (एक ही किली में) विवाह पूर्णतः वर्जित है। इनके विवाह की प्रमुख प्रथाएं इस प्रकार हैं:
- अरंडी (Arandi): यह माता-पिता द्वारा तय किया गया (Arranged) विवाह है, जिसे समाज में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
- राजी-खुशी विवाह: लड़का-लड़की की आपसी सहमति (प्रेम विवाह)।
- ओपोरतिप विवाह: जब लड़का-लड़की भागकर शादी कर लेते हैं (सहपलायन)।
- दाली टका (Dali Takka / Bride Price): मुण्डा समाज में विवाह के समय वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को कुछ नकद राशि और सामग्री दी जाती है, जिसे 'गोनोंग' या 'दाली टका' (वधूमूल्य) कहा जाता है।
मुण्डा जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (FAQ)
- प्रश्न: मुण्डा जनजाति के सर्वोच्च देवता कौन हैं?
- उत्तर: सिंगबोंगा (Singbonga), जिन्हें सूर्य का रूप माना जाता है।
- प्रश्न: मुण्डा जनजाति के युवागृह को क्या कहा जाता है?
- उत्तर: 'गीतिओड़ा' (Gitiora)।
- प्रश्न: मुण्डा समाज में 'किली' (Kili) शब्द का क्या अर्थ है?
- उत्तर: मुण्डा जनजाति में 'गोत्र' (Clan) को किली कहा जाता है।
- प्रश्न: 'उलगुलान' (महान विद्रोह) का नेतृत्व किसने किया था?
- उत्तर: भगवान बिरसा मुण्डा ने 1899-1900 में अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान का नेतृत्व किया था। वे मुण्डा जनजाति के सबसे बड़े महानायक हैं।
- प्रश्न: मुण्डा जनजाति में धार्मिक पूजा-पाठ कराने वाले व्यक्ति को क्या कहते हैं?
- उत्तर: 'पाहन' (Pahan)।
- प्रश्न: मुण्डा जनजाति का सबसे प्रसिद्ध युद्ध नृत्य कौन सा है?
- उत्तर: 'पाइका' (Paika) नृत्य, जिसमें पुरुष हाथों में ढाल और तलवार लेकर वीरता का प्रदर्शन करते हैं।
- प्रश्न: मुण्डा जनजाति का पवित्र पूजा स्थल क्या कहलाता है?
- उत्तर: 'सरना' (Sarna), जहाँ शाल (साल) के वृक्षों का झुरमुट होता है और ग्राम देवताओं का वास माना जाता है।